ये देश है वीर जवानों का
कुछ चोरो का गद्दारों
इन बेमानो का क्या कहना
चोरी बीबी का है गहना .......
भैसे के जैसे ऊँचे है
कुतिया की पूछ सी मूछें हैं
गदहे से ये चिल्लाते है
जूतों की माला पाते हैं
ये देश है वीर जवानों का ............................
गाली खाने के आदी हैं
बदन पे कपडे खादी है
गले में फूलो की माला
रंग तवे के जैसा है काला
ये देश है वीर जवानों का ............................
जब वोट मांगने आते हैं
बकरे जैसे मिमियाते हैं
हर घर में छछूंदर के जैसे
वादों की बीन बजाते हैं
ये देश है वीर जवानों का ............................
सबसे वादा काराजायेंगे हैं
महगाई को घटवायेंगे
संसद में पहुचतें ही यारो
पलटी ये करजायेंगे
ये देश है वीर जवानों का ............................
यूरिया से बाल बढ़ाते
खा के मोटे हो जाते हैं
चोरी के पैसो से देखो
गद्दते भी भरवाते हैं
ये देश है वीर जवानों का ............................
कोयला जला कर के
अन्दर की आग जलाते है
फिर देखो मासूमो पर
हवस की बिजली गिरते हैं
ये देश है वीर जवानों का ............................
जानवरों का चारा पचा जाते
गोबर भी नहीं निकलता है
टू जी स्पेक्ट्रम का पैसा
विदेशों में इनका निकलता है
ये देश है वीर जवानों का ............................
तोपों को बेंच विचारे ये
घर का खर्च चलाते हैं
खेल के पैसो निकाल कर
जीवन यापन कर लेते है
ये देश है वीर जवानों का ............................
इन कुतिया भैसों से
बच कर तुम्हे निकलना है
इन हबसी दरिन्दे जानवरों को
संसद में मत पहुचाना तुम .......!
ये देश है वीर जवानों का ............................
अगर आप हमारे इस ब्यंगात्मक कविता से मर्माहत होते हैं
तो मैं अपनी गलती अंगीकार करता हू और क्षमा प्रार्थी हूँ.. .....रजनीश शर्मा
कुछ चोरो का गद्दारों
इन बेमानो का क्या कहना
चोरी बीबी का है गहना .......
भैसे के जैसे ऊँचे है
कुतिया की पूछ सी मूछें हैं
गदहे से ये चिल्लाते है
जूतों की माला पाते हैं
ये देश है वीर जवानों का ............................
गाली खाने के आदी हैं
बदन पे कपडे खादी है
गले में फूलो की माला
रंग तवे के जैसा है काला
ये देश है वीर जवानों का ............................
जब वोट मांगने आते हैं
बकरे जैसे मिमियाते हैं
हर घर में छछूंदर के जैसे
वादों की बीन बजाते हैं
ये देश है वीर जवानों का ............................
सबसे वादा काराजायेंगे हैं
महगाई को घटवायेंगे
संसद में पहुचतें ही यारो
पलटी ये करजायेंगे
ये देश है वीर जवानों का ............................
यूरिया से बाल बढ़ाते
खा के मोटे हो जाते हैं
चोरी के पैसो से देखो
गद्दते भी भरवाते हैं
ये देश है वीर जवानों का ............................
कोयला जला कर के
अन्दर की आग जलाते है
फिर देखो मासूमो पर
हवस की बिजली गिरते हैं
ये देश है वीर जवानों का ............................
जानवरों का चारा पचा जाते
गोबर भी नहीं निकलता है
टू जी स्पेक्ट्रम का पैसा
विदेशों में इनका निकलता है
ये देश है वीर जवानों का ............................
तोपों को बेंच विचारे ये
घर का खर्च चलाते हैं
खेल के पैसो निकाल कर
जीवन यापन कर लेते है
ये देश है वीर जवानों का ............................
इन कुतिया भैसों से
बच कर तुम्हे निकलना है
इन हबसी दरिन्दे जानवरों को
संसद में मत पहुचाना तुम .......!
ये देश है वीर जवानों का ............................
अगर आप हमारे इस ब्यंगात्मक कविता से मर्माहत होते हैं
तो मैं अपनी गलती अंगीकार करता हू और क्षमा प्रार्थी हूँ.. .....रजनीश शर्मा
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